अर्धसैनिक बलों की विलय योजना तैयार, इस साल दो हजार जवानों से होगी शुरुआत

लगभग तीन साल पहले नोटबंदी के दौरान पुराने नोटों के बदले सोना बेचने वाले ज्वैलर्स अब फंस सकते हैं। दरअसल, आयकर विभाग ने हाल ही में दर्जनों ज्वैलर्स को नोटिस भेजकर नवंबर, 2016 में घोषित नोटबंदी के दौरान सोना खरीदने वाले ग्राहकों से ली गई धनराशि का ब्योरा मांगा है। कई ज्वैलर्स और कर अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने कालेधन पर शिकंजा कसने के लिए आठ नवंबर, 2016 को जब 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट बंद करने का एलान किया था, तो मुंबई के एक ज्वैलर के यहां नेकलेस, अंगूठियो सहित सोने से बने तमाम आभूषण खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। एक ज्वैलर ने कहा कि उसने एक ही दिन में भारी प्रीमियम के साथ अपना पूरा स्टॉक बेच दिया था और इतनी कमाई की थी, जो उसे आम तौर पर दो हफ्ते में होती थी। उन्हें लगभग तीन महीने पहले कर नोटिस मिला है, जिसमें उनकी कमाई के स्रोत के बारे में जानकारी मांगी गई है। साथ ही उनसे उस रात हुए पूरे राजस्व के बारे में बताने का आदेश दिया गया है, जिसके कालेधन होने का संदेह जाहिर किया जा रहा है। इस ज्वैलर ने आदेश के खिलाफ अपील दायर की है, लेकिन भारतीय कानून के तहत उन्हें विवादित धनराशि का 20 फीसदी हिस्सा जमा करना पड़ा था।

अपील करनी है तो जमा करनी होगी 20 फीसदी रकम

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि भारत के लगभग 15 हजार ज्वैलर्स को नोटिस भेजकर कर की मांग की गई है। मेहता का अनुमान है कि रत्न और आभूषण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई है। उन्होंने कहा, ‘दीर्घावधि में उद्योग को इससे समस्या हो सकती है, क्योंकि अपील के वास्ते 20 फीसदी जमा करने पर उन्हें सोना-चांदी या आभूषण खरीदने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है।’

उद्योग के लिए बढ़ेगा संकट

सुरेंद्र मेहता ने कहा, अगर वे मुकदमे हार जाते हैं तो ज्वैलर्स को कर्ज पर डिफॉल्ट करना पड़ सकता है, जिसका संभावित तौर पर आपूर्तिकर्ताओं पर बैंकरों पर भी असर पड़ेगा। कर अधिकारी अपने अधिकारों के भीतर पिछले राजस्व पर कर्ज की मांग कर रहे हैं, जिसकी जांच में समय लगता है लेकिन अधिकारियों के लिए कर के रूप में पूरे राजस्व की मांग करना एक असामान्य बात है। दो वरिष्ठ कर अधिकारियों ने कहा कि विभाग ने इस साल ज्वैलर्स सहित हजारों लोगों को नोटिस भेजे हैं, जिनके माध्यम से अनुमानित तौर पर डेढ़ से दो लाख करोड़ रुपये तक की कर मांग की गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और वित्त मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की और सरकार की तरफ से ज्वैलर्स से की गई मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

घटा राजस्व तो आई नोटबंदी की याद

कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मोदी सरकार की इस पहल का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 11 साल के निचले स्तर पर पहुंचती दिख रही है। चालू वर्ष में भारत का कंपनी कर और आयकर संग्रह में लगभग दो दशक में पहली बार गिरावट आने का अनुमान है।